अकेलापन

शादी की पहली रात जब कोई और तुम्हें देखेगा
तो जल जाऊँगा में ।
कोई और तुम्हें छुएगा तो
तड़प जाऊँगा में।
तुम तो एक बार कह भी लोगी की ये शादी एक समझोता हैं।

में किससे कहूँगा की मेरा तन्हा होना मेरी मज़बूरी हैं।

क्यों मेरी मौहब्बत को मजबूरियों का हवाला देकर ठुकरा दिया..?

क्यों वो सारे हक़ किसी और को दे दिए जिनका हक़दार में था....

क्यों मेरा हर सपना जिंदा होने से पहले ही मार दिया......

क्यों छीन ली मुझसे जीने की वजह.....

सारी उम्र साथ निभाने का वादा किया था फिर क्यों पहले मोड़ पर ही छोड़ दिया हाथ मेरा....

माना की मजबूरियाँ होंगी तुम्हारी
मगर प्यार से बड़ी है क्या मज़बूरी...

चलो तुमने तो कह दिया...
हम किससे कहे की हमारी भी मज़बूरी है ....“तड़प" अकेलापन....
-ब्लेंक राइटर

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