जब मौहोब्बत

जब मौहोब्बत फासलों पर होती है।
तब क़ायनात हौसलों पर होती है।
दूरियों का मजा नशा बनकर रगो में घुल जाता है।
तब कश्ती साहिलों पर होती है....

जब मौहोब्बत फासलों पर होती है....
-ब्लेंक राइटर

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